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आ...छीं, आ...छीं ! कैसे बचे ज़ुकाम से, इस मौसम में !

जकल जैसा मौसम है उसमें ज़ुकाम के हो जाने का ख़तरा बना रहता है. मुझे तो ज़ुकाम ने ऐसा पकड़ा कि पूछिये मत ! ईद की छुट्टी की वाट लगा दी ये तो गनीमत थी कि मैंने कण्ट्रोल कर लिया. इस गर्मी में बदलते हुए मौसम में ठन्डे पानी का सेवन तो ऐसे है जैसे शादी का लड्डू. जैसे शादी का लड्डू जो खाता है वह भी पछताता है और जो नहीं खाता है वह भी. ठीक उसी तरह से जो बदलते मौसम में ठंडा पानी पीने वाले की ख़ैर नहीं और जो डर से ना पीये उसको भी ख़ैर ना महसूस हो. इसी दरमियान मैंने जानने की कोशिश की कि ज़ुकाम को समय रहते कैसे कण्ट्रोल किया जा सकता है? ज़ुकाम होने के कौन-कौन से कारण हैं? क्या करें और क्या ना करें? वगैरह वगैरह...

ज़ुकाम आख़िर होता क्यूँ है?
ज़ुकाम को अगर हम साधारण रूप से परिभाषित करे तो कहेंगे कि यह नाक और साँस-तंत्र में होने वाला संक्रमण है. ज़ुकाम होने की मुख्य पहचान 'नाक बहने या बन्द होने से' होती है. नाक बन्द होना या बहना वाइरस के कारण होता है. 'कोराना, एडेनो, राईनो' जैसे वाइरस इसके वाहक हैं. ज़ुकाम होने के लक्षण में कई मर्तबा आपको शरीर में बहुत ज़्यादा दर्द और सुखी खाँसी की समस्या भी हो सकती है जो कि 4-5 दिन से 8-9 दिन तक रहती है. अक्सर लोग ज़ुकाम हो जाने पर ढीला-ढाला रवैया अख्तियार करतें है जिसकी वजह से यह बीमारी को और भी अधिक बढ़ा सकता है.

ज़ुकाम कब होता है?
ज़्यादातर बदलते मौसम में ज़ुकाम होता है क्यूंकि बदलते मौसम में हमारे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमज़ोर पड़ जाती है. यही वजह है कि सर्दियों में जब अचानक तापमान कम होने लगता है तो ज़ुकाम पकड़ लेता है और वहीँ गर्मियों के बाद बरसात में भी ज़ुकाम पकड़ लेता है. गर्मियों के बाद बरसात में अक्सर हम एयर कंडीशन से धुप में, धुप से एयर कंडीशन में जाने से हमारे शरीर का तापमान में अचानक गिरावट आ जाती और यही सबसे बड़ी वजह है ज़ुकाम की. शरीर के तापमान में अचानक  गिरावट से हमारा शरीर होने वाले संक्रमण से लड़ने के लिए अक्सर तैयार नहीं हो पाता है.

ज़ुकाम की रोकथाम, कैसे?
ज़ुकाम की रोकथाम के लिए कुछ सावधानियां कर लेने से बचाव किया जा सकता है:

  • अचानक गरम से ठन्डे और ठन्डे से गरम माहौल में ना जाए.
  • पसीना आने के फ़ौरन बाद अथवा दौड़-धूप/खेलने के फ़ौरन बाद ठंडा पानी बिल्कुल ना पीयें.
  • गरम खाना ख़ा लेने के उपरान्त ठंडा खाना ना खाएं.
  • मौसम के लिहाज़ से कपडे पहने.
  • धूल भरे माहौल से बचें और ऐसे में नाक को कपड़ें से ढक लें.
  • अपने शरीर को यथा-संभव स्वच्छ रखें.
  • हाथों को धोते रहें, जब भी गंदे हों क्यूंकि ज़्यादातर ज़ुकाम अशुद्ध हांथों से भी होता है.
  • सार्वजनिक चीज़ों जैसे करेंसी-नोट, दूसरों के पेन, कागज़ वगैरह के प्रयोग में सावधानियां बरतें.
  • अपने साथ हर वक़्त रुमाल आदि लेकर चलें.
  • सुबह में ताज़ी हवा का सेवन करने की कोशिश करें, दिन में भी ताज़ी हवा लें.
  • भीड़ भरे स्थान और धूल भरे माहौल से बचें.
  • पौष्टिक और पोशाक भोजन का ही सेवन करें, मौसम के लिहाज़ से भोजन करें. कोशिश करें कि भोजन में हरी सब्जियां ज़रूर हो.
  • वो खनिज़ और विटामिन भरी चीज़ें खाएं जिनमें रोग प्रतिरोधक तत्व मौजूद हों.
  • खूब तरलता भरा भोजन करें, रेशेदार फ़ल और सब्जियों का इस्तेमाल करें.
  • ज़ुकाम-ग्रस्त लोगों से दूरी बनायें रखें.
फ्लू और ज़ुकाम में फ़र्क़
अक्सर लोग फ्लू और ज़ुकाम में फ़र्क़ नहीं जान पाते हैं और फ्लू को ज़ुकाम समझने की भूल कर बैठते हैं जबकि दोनों में फ़र्क़ है. ज़ुकाम और फ्लू (इन्फ़्लुएन्ज़ा) के अंतर जो जानना बहुत ज़रूरी है. फ्लू इन्फ़्लुएन्ज़ा वाइरस से होता है जबकि ज़ुकाम के होने का अलग कारण है. दोनों बीमारियाँ एक दुसरे से मिलती ज़रूर है लेकिन उनको एक जैसा समझ लेना हमारी चूक होगी. फ्लू के दरमियान खूब तेज़ बुख़ार से सिर-दर्द, बदन-दर्द, सूखी-खाँसी और बेहद कमज़ोरी भी महसूस होती है.

-सलीम ख़ान  
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+ comments + 3 comments

18 सितंबर 2010 को 9:31 pm

मालिक सब पर अपनी महर करे
@ प्यारे भाई salim! is subject par aapne achha likha hai lekin log khatna ke bare men bhi janna chahte hain , please us par bhi jankari den .
1- नसबंदी का समर्थन किसी धर्मग्रंथ में नहीं मिलता। इटली और चीन आदि जिन देशों में कमअक्ल लोगों ने इस पर अमल किया आज उनमें बूढ़े लोगों की तादाद ज़्यादा है और नौजवानों की कम , लड़कियों की तादाद तो लड़कों से भी कम है । कुछ देश इस योजना को बंद कर चुके हैं और बाक़ी सोच रहे हैं । भारत में लोगों ने इस पर ज़्यादा ध्यान नहीं दिया यही वजह है कि आज दुनिया में सबसे ज़्यादा युवा शक्ति भारत के पास है। अगर नेता लोग अपनी ‘कफ़नचोरी‘ की आदत से बाज़ आ जायें तो हर चीज़ यहां है। गोदामों से बाहर सड़ता हुआ अनाज इसका गवाह है।
2- ख़तना एक धार्मिक संस्कार है इससे पवित्र रहना आसान है. बीमारियों की रोकथाम में भी मददगार है जगह-जगह स्थापित लिंग के स्टेच्यूज़ पर भी लटकी हुयी खाल दिखई नहीं देती, इससे पता चलता हैं कि यहूदियों और मुसलमानों से पहले भी ज्ञानी पुरुष अपने लिंग को लटकी हुई खाल से मुक्त रखना पसंद करते थे।
ख़तना पूरी तरह वैज्ञानिक है खतना का वैज्ञानिक आधार यहाँ देखेंयहाँ पढ़ें
@ रविन्द्र जी ! कुरआन के सम्बन्ध में ग़लतफहमियों के निराकरण लिए देखें स्वामी लक्ष्मीशंकराचार्य जी का महान शोध ग्रन्थ इस लिंक पर http://siratalmustaqueem.blogspot.com/2010/09/blog-post_15.html
वंदे ईश्वरम्
जय हिन्द
ऊँ शांति

18 सितंबर 2010 को 10:52 pm

काम की जानकारी!

19 सितंबर 2010 को 7:12 am

स्वास्थयवर्धक जानकारी का आभार!!

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