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Saleem Khan

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कच्ची उम्र में जिसने यह आदत से दूरी बना ली ज़्यादातर आगे कम ही चांसेज़ होते हैं कि बुरी आदत अख्तियार कर ले: Saleem Khan


ज़रूरी यह नहीं कि आप किस तरह से लोगों को सिगरेट पीने अथवा स्मोकिंग से होने वाले नुक्सान से अवगत करा रहें है, ज़रूरी यह है कि आप अपनी तरफ़ से उन सभी स्मोकर्स को यह मैसेज ज़रूर पहुंचाएं, जितना हो सके! और मेरी तरफ़ से यह पूरी कोशिश रहती है कि सुधारात्मक लेख ही लिखूं बल्कि यों कह लें कि मेरी इसी शैली में महारत हासिल है, फ़िर चाहे वह कोई भी क्षेत्र क्यूँ न हो !!!  इसी शैली में एक और चौका मारते हुए मैंने अपनी पिछली पोस्ट में शराब पीने से होने वाली हानि के बारे में थोड़ी रौशनी डाली. 

ब्लॉगर्स बन्धुवों को मैं बताना चाहता हूँ कि ज़्यादातर बुरी आदतें बच्चे और टीनेज़र्स बड़ी ही आसानी से ग्रहण करते हैं, अगर उन्हें बड़ों द्वारा रोकथाम न की गयी तो वह उसे अपनी आदत बना डालते हैं. कच्ची उम्र में जिसने यह आदत से दूरी बना ली ज़्यादातर आगे कम ही चांसेज़ होते हैं कि बुरी आदत अख्तियार कर ले. छोटे बच्चों को तो बहुत ही आसानी से समझाया जा सकता है; जैसे उन्हें कोई धुम्रपान से होने वाली हानियों पर निबंध लिखवा कर आदि. ऐसा करके उन्हें कम से कम यह पाता तो ज़रूर चल जायेगा कि इसके नुक्सानात क्या-क्या हैं.  

चाहे कोई हो अगर वह धूम्र पान की हानि और दुष्प्रभाव के प्रति समाज को अवगत कराना चाहता है उसके लिए आप इसके प्रति समाज में जागरूकता फैलाएं, लोगों को बताये कि धुम्रपान हमारे स्वास्थ्य के लिए किसी धीमे ज़हर से कम नहीं. उन्हें यह अहसास दिलाएं कि भले ही वक्ती तौर पे अथवा वर्तमान में उन्हें इस आदत में सुख मिल रहा हो मगर आने वाले समय में यह सुख दुःख में तब्दील हो के ही रहेंगा और तब तक बहुत देर हो चुकी होगी. धुम्रपान वास्तव में एक ऐसी आदत है, जो मन से जुडी हुई है और इसका विरोध जरूरी है। धुम्रपान करने से कैंसर के साथ ही साथ तपेदिक का खतरा भी बढ़ जाता है। आप भले ही कहीं भी करें, बच्चों के लिए खतरनाक है। और अगर आप धुम्रपान वास्तव में छोड़ना चाहते हैं, तो उसके लिए उपाय हाजिर हैं। और अब तो आईफोन भी इसमें आपकी मदद करेगा। आपको बताना चाहूंगा कि इसके छुटकारे लिए वैज्ञानिकों ने लेजर तकनीक विकसित की जा चुकी है। और अंत में एक बात कि अगर आप एक बार ठान लें, तो फिर धुम्रपान की छुट्टी तय है। और अगर आप यह जानना चाहते हैं कि निषेध स्थल पर धुम्रपान की शिकायत किससे की जाए, तो उसके लिए भी जानकारी हाजिर है. 

अगर सामने वाला धुम्रपान कर रहा है तो आप भले ही धुम्रपान न करते हो फ़िर भी आपको नुक्सान होगा बल्कि उससे भी ज़्यादा नुक्सान होगा जितना कि स्वयं धुम्रपान करने वाले को होगा. कैसा महसूस होता है जब आपके आसपास कोई धुम्रपान करता है और आपको उसकी स्मेल (महक) महसूस होती है? इसे क्विट स्मोकिंग कहते है. कहने का तात्पर्य यह है कि भले ही आप धुम्रपान नहीं करते हैं मगर फ़िर भी आप परोक्ष रूप से धुम्रपान कर रहें है और उसका खामियाज़ा आपको धुम्रपान न करने के बावजूद भुगतना पड़ता है ! यानि आप धुम्रपान करें न करे मगर उससे होने वाला नुक्सान आप को भी उतना ही हो रहा है जितना कि धुर्म्पान करने वाले को !! तो इस स्थिति में आप उसी श्रेणी में आ गए और अब आपका यह फ़र्ज़ बनता है कम से कम अपने आपको इस हानि से बचाएं!!!  

अब आपको लग रहा होगा सलीम भी न क्या लेकर बैठ गया. आख़िर हम क्यूँ किसी को समझाने जाएँ और क्यूँ जाएँ इस फ़ालतू के काम को करने को !! तो जनाब इसका बहुत ही आसान जवाब है "अगर आप किसी को हानियों से अवगत करा रहें है तो अपने स्वास्थ्य के साथ आप पूरा पूरा न्याय कर रहें हैं!!!

सिगरेट छोड़ें और समाज के स्वास्थ की रक्षा के लिए एक उदाहरण बने:

क्या आप नशेडी क़िस्म के स्मोकर हैं, तो आईये आज से ही क़सम खाईये आप धुम्रपान से तौबा करेंगे. इसके लिए आपको बस अपनी इच्छाशक्ति को मज़बूत बनाना होगा. शुरू में भले ही यह अटपटा और तकलीफदायक लगे, आपको डिप्रेशन लगे मगर घबराएँ नहीं बस फैसला ले कर उसे फ़ौरन अमल में लायें. और अगर आप ऐसा करते हैं तो आप अपने स्वास्थ्य के साथ न्याय तो करते ही हैं साथ ही साथ दूसरों के लिए एक उदहारण भी बनते हैं

अगर आप पिता है और धुम्रपान का त्याग करते हैं तो आप अपने बच्चों के लिए एक आदर्श पिता हो जायेंगे. उन्हें ऐसा महसूस होगा और वे समझ जायेंगे कि ज़रूर यह गलत आदत थी इसी लिए पिता जी ने धुम्रपान से तौबा कर ली. वे उससे दूर रहने के लिए प्रेरित होंगे और बड़े होने पर उनकी ऐसी आदत अख्तियार करने के चांसेज़ कम ही होंगे. सबसे बड़ी बात होगी कि इस ज़हर से आपने स्वयं को बचाया, अपने बच्चो को बचाया, अपने परिवार को बचाया अपन मिलने जुलने वालों को बचाया.

अगर आप चेन स्मोकर है और फ़िर सिगरेट आदि पीने से तौबा करते है तो आप ग़ैर-धुम्रपान समाज के लिए ब्रांड एंबेसडर से बन जायेंगे और आपका चेन स्मोकर से नॉन-स्मोकर का सफ़र आपको ग़ैर-धुम्रपान समाज के लिए एक असीम सी शक्ति देगा !!! 

तो क्या सोचा आपने? आप आज बल्कि अभी इसी पोस्ट को पढ़ते पढ़ते पढ़ते ही यह क़सम खाईये कि धुम्रपान आज से बिल्कुल बंद !! बिल्कुल बंद - आपकी ख़ातिर, आपके बच्चो की ख़ातिर, समाज की खातिर, देश की ख़ातिर, इंसानियत के ख़ातिर !!!

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शराबखोरी की सबसे बड़ी वजह है इसका वंशानुगत होना: Saleem Khan


शराब जिसका नाम सुनते ही उन लोगों के मन में आनन्द का संचार हो उठता है जो इसका प्रयोग करते हैं और वहीँ उन लोगों के मन में घृणा का संचार होता है जो इसका प्रयोग नहीं करते हैं. सवाल ये उठता है कि ऐसी कौन सी वजह है जो इंसान को शराब पीने का आदि बना देती है? ऐसे कौन से कारण हैं जिससे कोई मदमस्त होने के लिए बेक़रार हो उठता है?  शराबखोरी की सबसे बड़ी वजह है इसका वंशानुगत होना. शराबी (alcoholics) और गैर-शराबी (non-alcoholic) व्यक्ति में एक फ़र्क होता है, एक दिमाग़ी फ़र्क. शराबी के दिमाग में एक ख़ास तरह का रसायन (THIQ) पाया जाता है जबकि जो गैर-शराबी है उनमें यह नहीं पाया जाता है. वैज्ञानिकों ने शोध के ज़रिये यह निष्कर्ष निकला है कि ज़्यादातर शराबी का बेटा शराबी होता है वहीँसामान्यतया एक शराबी की बेटी की शादी शराबी से होती है. यह भी पता चला कि अगर कोई शराबी की संतान को कोई स्वस्थ दंपत्ति (गैर-शराबी ही क्यूँ न हो) गोद लेता है तो उसकी अपनी संतान के मुक़ाबले गोद ली हुई संतान शराब का सेवन अधिक मात्रा में करती है.

शराब के मुताल्ल्लिक़ जानवरों पर किये गए शोध से कुछ नए तथ्य सामने आये ! वैज्ञानिकों ने यह जानने की कोशिश की कि आखिर कौन से ऐसे फ़र्क हैं जो शराब के सेवन करने और शराब के सेवन न करने वालों के बीच हैं. उन्होंने उनको अल्कोहल का इंजेक्शन दिया और पाया कि वे बेहोश से होने लगे (अर्थात सोने से लगे). जबकि कुछ लगभग सामान्य ही रहे.  

यह तो हम जानते ही है कि अल्कोहल एन्जाईम से ओक्सिकृत को कर एसीट एल्डीहाईड बनता है और एसीट एल्डीहाईड भी ओक्सिकृत होकर एसिटिक एसिड बनता है. यह किण्वन प्रक्रिया है. आख़िर यह प्रक्रिया होती क्यूँ है? क्यूँ इस तरह के एन्जाईम हमारे शरीर में पैदा होते हैं? क्या ईश्वर ने हमें बनाते वक़्त यह predict (अनुमान) लगा लिया था कि हम एक दिन शराब पीने लगेंगे और इस तरह के एन्ज़ाईम्स की ज़रुरत हमें पड़ेगी??? अगर हम शराब न भी पीयें तब भी हमारे शरीर में किण्वन क्रिया होती है और इंडोजीनियस नामक अल्कोहल (endogenous alcohol) बनता है. हमारे ख़ून में अल्कोहल की कुछ न कुछ मात्रा ज़रूर होती है. अरे अरे घबराईये नहीं... यह शराब नहीं है और न ही इससे नशा आ जायेगा...और यह इतना कम होता है कि ड्राइविंग करते वक़्त आपको नशे में होने के कारण अरेस्ट होने का कोई ख़तरा नहीं है!!! हाँ यह ज़रूर है कि अगर यह एंजाइम्स हमारे शरीर में न हो तो नशे का खतरा बढ़ जायेगा. एन्ज़ाईम्स के कारण ही इंडोजीनियस नामक अल्कोहल (endogenous alcohol) का ऑक्सीकरण होता है.

जब कोई शराब का सेवन करता है तो उसमें एन्ज़ाईम्स द्वारा उक्त क्रियान्वयन होता है अगर किसी में यह कम मात्रा में होगा तो उसको पीते वक़्त बहुत बुरा आभास होता है क्यूंकि एन्ज़ाईम्स द्वारा अल्कोहल या एसिड एल्डीहाईड का पर्याप्त ऑक्सीकरण नहीं हो पाता है. और इस तरह से एसिड एल्डीहाईड की मात्रा बढती है और वह पीने वाले को विषाक्त अनुभव सा अहसास दिला यह आभास करा देती है कि उसे अब पीना बंद कर देना चाहिए. इसके ठीक विपरीत जिस व्यक्ति में प्रबल एन्ज़ाईम्स क्रियान्वयन होता है वह शराब को बहुत अधिक मात्रा में पी सकने की सहनशीलता रखता है और जब वह एक बार शुरू कर देता है तो ख़त्म होने का नाम ही नहीं लेता है अर्थात वह जल्दी खत्म नहीं करता है. ऐसे ही व्यक्तियों को नशेडी नंबर 1 या शराबी नंबर 1 कहा जाता है. शराबखोरी की अन्य वजहें भी हो सकती है लेकिन एन्ज़ाईम्स का यह क्रिया-कलाप निर्भर करता है हमारे जींस पर !!! यही वजह है कि शराबखोरी की सबसे बड़ी वजह इसका वंशानुगत होना है. वैज्ञानिकों ने शोध के ज़रिये यह निष्कर्ष निकला है कि ज़्यादातर शराबी का बेटा शराबी होता है !!! आप बताईये क्या आपका बेटा शराब पिएगा ??? 

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जब 'गौरैया' ने हमारे घर में घोंसला बनाया था, ऐसा लगा मानो घर में कोई मेहमान आया था: Saleem Khan


र्वप्रथम मैं जनाब केके मिश्रा और जनाब डीपी मिश्रा को धन्यवाद कहना चाहता हूँ जो dudhwalive.com व अपने ब्लॉग के माध्यम से निरन्तर प्रकृति के प्रति जागरूकता फैला रहें हैं. जनाब डी पी मिश्रा जी से मेरा परिचय लगभग एक वर्ष पुराना है और वे मेरे भाई समीउद्दीन नीलू (लखीमपुर खीरी में कार्यरत अमर उजाला संवाददाता) के मित्रों में से हैं. मैं ज़िला पीलीभीत का रहने वाला हूँ जो लखीमपुर का पड़ोसी ज़िला है. दुधवा नेशनल पार्क मेरे घर के 60-70 किमी. की दूरी पर है. जनाब डीपी मिश्रा जी ने ही मुझे एसएम्एस द्वारा बताया कि आने वाले २० मार्च को विश्व गौरैया दिवस है. एसएम्एस आया, जागरूकता भी बढ़ी लेकिन मुझे बहुत ज़्यादा जज़्बाती बना गयी.

मुझे याद है बचपन में झाले (HUT) के केंद्र में लगे लकड़ी के बीम के ऊपर गौरैया अपना घोंसला बनाती थी और उसमें अंडे देती थी जिसमें से कुछ दिन बाद बच्चे निकलते थे. मुझे याद है, मैं बहुत देर-देर तक घोंसले और गौरैया के बच्चों को निहारता रहता था. वैसे मैं आपको बता दूं कि बचपन में मैं प्रकृति के प्रति बहुत ज़्यादा संवेदनशील था. मेरे घर में उस वक़्त 12 अमरुद के पेड़ 7 आम के पेड़ और अन्य पेड़ भी लगे थे जिनमें नीम्बू, बाँसवाड़ी आदि थे. यही नहीं मेरे घर के आगे बागीचा था जिसमें तरह के फूल लगे थे. बगीचा में भी तरह की चिड़ियों ने अपना घोंसला बनाया हुआ था जिनमें गौरैया और बुलबुल मुख्य रूप से थीं जिनका स्मरण मुझे अभी तक है. मगर अफ़सोस कि अब शहर में ही ज़्यादातर रहने के कारण वहां पर किसी भी प्रकार की कोई देखभाल भी नहीं हो पा रही है.
मुझे एक बात का स्मरण और भी है आज से क़रीब 7-8 वर्ष पूर्व एक रिश्तेदार ने मुझसे पूछा कि 'सलीम, क्या तुम्हे मालूम है कि आने वाले वक्तों में गौरैया गुम हो जायेंगी और उनका नामों-निशाँ तक नहीं बचेगा?' मैंने पूछा- 'वो कैसे?' उन्होंने कहा कि 'ये जो मोबाइल है इनके विनाश का मुख्य कारण बनेगा!!!' तभी से मुझे यह ज्ञात हुआ कि ये संचार क्रांति ही गौरैया के विनाश का मुख्य कारण बन रही है. बिजली के तार, माइक्रोवेव, मोबाइल टावर की वजह से गौरैया खत्म होती जा रही हैं. यह तो एक कारण है ही और मैं इससे भी बड़ा कारण मानता हूँ कि भौतिकवाद ने हमें पत्थर दिल बना दिया है !

आप अपने आप से पूछिये क्या आप इन चिड़ियों गोरैया आदि को देख कर बचपन में खुश न होते थे? क्या आपको ऐसा कुछ करने का मन नहीं होता था, आप उनके लिए भी कुछ न कुछ करें जिससे वे हमेशा या ज़्यादातर आपकी आँखों के सामने रहें? सुबह को क्या आपको चिड़ियों की चहचहाट सुहानी नहीं लगती थी? क्या सांझ ढले इनके घोंसलों की वापसी की बेला में इनका सुहाना शोर एक संगीतात्मकता सा अनुभव न कराता था? आखिर हम इतने कठोर कैसे हो गए? हम प्रकृति के प्रति इतने उदासीन क्यूँ हो रहें है? इन सब सवालों में ही इन पक्षिओं के बेहतरी का जवाब छुपा है!!

गौरैया कैसी होती है?
गौरैया एक छोटी चिड़िया है. यह हल्की भूरे रंग या सफ़ेद रंग में होती है. इसके शरीर पर छोटे छोटे पंख और खुबसूरत सी पीली चोंच होती है और पैरों का रंग हल्का पीला होता है. नर गोरैया की पहचान उसके गले के पास काले धब्बे से होता है. 14 से 16 सेमी. लम्बी यह चिड़िया मनुष्य के बनाए हुए घरों के आस पास रहना पसंद करती हैं. यह लगभग हर तरह की जलवायु में रहना पसंद करती हैं. शहरों और क़स्बों में बहुतायत से पाई जाती है. नर गौरैया के सिर का उपरी भाग, नीचे का भाग और गालों के पर भूरे रंग का होता है. गला चोंच और आँखों पर कला रंग होता है और पैर भूरे होते है. मादा के सिर और गले में भूरा रंग नहीं होता है. सामान्यतया नर गौरैया को चिड्डा और मादा गौरैया को चिड्डी अथवा चिड़िया कहते हैं.

गोरैया संरक्षण कैसे हो?
गौरैया को बचाने की मुहीम सिर्फ ज़ुबानी ही न हो बल्कि ज़मीनी भी हो. हम सिर्फ चर्चा ही न करें बल्कि उस पर अमल भी करें! हम उनके लिए अपने घर में उनके घोंसलों के लिए कुछ सेंटीमीटर जगह दें, अपने निवाले में से दो चार दाने  उनके लिए छोड़ दें!
धुनिक होते हमारे रिहाइशी आशियानों में कुछ जगह इनके लिए भी दें, इनमें कुछ खुली जगहों पर गड्ढेनुमा आकृतियाँ बनाईये, लकड़ी आदि का बॉक्स बनाईये. अपने घर के खाने के बचे हुए अन्न को नाली में फेंकने के बजाये उन्हें खुली जगह में रखें जिससे ये पक्षी अपनी भूख मिटा सकें. प्लीज़ !!!
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ग़ैब से चलने लगी जब एक ज़हरीली हवा!

ग़ैब से चलने लगी जब एक ज़हरीली हवा और रोज़ उसे 20,000 लीटर पीते चले गए! जी हाँ, एक औसत व्यक्ति हर रोज़ लगभग 20,000 लीटर हवा ग्रहण करता है. हर उस पल जब हम सांस लेते हैं, ज़हरीले और ख़तरनाक रसायनों के साँस के दौरान शरीर के अन्दर जाने का ख़तरा रहता है जो कि विभिन्न कारणों व माध्यमों से वायु में मौजूद रहते हैं. वायु में इन ख़तरनाक रसायनों अथवा पदार्थों की मौजूदगी ही उसे दूषित करती है जिसके कारण "वायु प्रदुषण" अर्थात Air pollution होता है. ये ख़तरनाक पदार्थ ज़्यादातर गैस की अवस्था में होते है, परन्तु कहीं कहीं ये सूक्ष्म कण के रूप में भी मौजूद होते हैं. घर में या बाहर, वायु प्रदुषण कहीं भी हो सकता है. कारखानों, गाड़िओं आदि से निकलने वाली ज़हरीली गैसें नाइत्रोज़न ओक्साइड, कार्बन मोनोओक्साइड और विभिन्न प्रकार के कार्बनिक यौगिक जो कि भांप की शक्ल में आकर हवा में आसानी से मिल जाते हैं. जिसके कारण वायु प्रदूषित हो जाती है.
निम्न चित्र के माध्यम से हम वायु प्रदुषण के कारण व इसके दुष्प्रभावों को आसानी से समझ सकते हैं.

(चित्र पर चटका लगाकर इसे और बड़ा करें)

प्राकृतिक व मानवीय दोनों ही वायु प्रदुषण के लिए ज़िम्मेदार हैं बल्कि अतिश्योक्ति न होगी अगर हम कहें कि प्राकृतिक कारणों के अपेक्षा मानवीय कारणों से वायु प्रदुषण अधिक होता है. यह समस्या हमारे संसार के लिए नयी नहीं है बल्कि यह तो प्राचीन काल से हमारे लिए चुनौती है. पर्यावरणविद्दों को कई ऐसे सबूत मिले हैं जिससे यह साबित होता है कि प्राचीन समय में भी मनुष्य इस ज़हरीली हवा की चपेट में था. लेकिन अफ़सोस कि मानव मात्र की भौतिकवादिता इस क़दर संवेदनहीन हो चुकी है कि वह वर्तमान के लाभ के लिए भविष्य को और अँधेरे में धकेलता जा रहा है, वह यह नहीं सोच रहा कि कल उसकी ही संतान उसके दुष्कृत्य की बहुत ही भयानक सज़ा भुगतेगी. क्या इस सवाल का जवाब 'हां' में नहीं होगा कि हमारे पूर्वज भी ऐसा दुश्क्रिय कर चुके है जिसकी विरासत को हम इतनी तेज़ी से आगे बाधा रहें हैं?

वायु प्रदुषण के दुष्प्रभाव नाना प्रकार के हो सकते है. यह हमारे शरीर के श्वास अंगों पर बहुत बुरा प्रभाव डालते हैं और हमारे स्वास्थ्य के लिए अति हानिकारक होते हैं. यही नहीं यह पुरे पारिस्थिकीय तंत्र में भी फ़ेरबदल कर डालते हैं और इन सबकी वजह सिर्फ हम इंसान हैं.

वायु प्रदुषण बहुत ही आसानी से फैलता है क्यूंकि इसका माध्यम वायु है जो कि पूरे पर्यावरण में बहुत आसानी से विचरित होती है. अगर हम आंकड़ों और हकीकत पर अपने नज़र दौडाएं तो हमें पता चलता है कि दुनियां के कई ऐसे शहर है जहाँ इंसान शुद्ध हवा के बजाये ज़हरीला धुवां पीता है. दुनियां के 20 सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में अकेले चीन के 16 शहर हैं और भारत चीन के पड़ोस में ही स्थित है. भारत में सर्वाधिक प्रदूषित शहरों में लखनऊ का नंबर  चौथा है. जबकि मुंबई 40वें स्थान पर है

हमें व्यक्तिगत स्तर पर हर संभव कोशिश करनी होगी कि हम इस ज़हरीली हवा के उत्पादन के हिस्सा न बने. हमें वायु प्रदूषण के भयावह प्रसार को रोकना होगा. हम यह कह कर अपना पल्ला नहीं झाड सकते कि यह काम सरकार का है. यह समस्या सरकार की नहीं पुरे विश्व की है. कई देश इस प्रदुषण के लिए दुसरे देशों पर तोहमत देते रहते हैं और स्वयं इस के उपाय के लिए चिंतित नहीं रहते हैं.

यह जल प्रदुषण, ग्लोबल वार्मिंग की तरह एक वैश्विक समस्या है. हमें तोहमत लगाने की अपेक्षा एकसाथ मिलकर इस समस्या का हल ढूँढना होगा!

मैं आपसे पूछता हूँ क्या आप इस पहल का हिस्सा बनने के लिए  तैयार हैं !!!???
-सलीम ख़ान
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