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तरह-तरह के साँप (Different Types of Snake)




सावन के महीने में आईये जाने कुछ साँप के बारे में !  
शीर्षक और फ़ोटो देख कर डर तो नहीं लगा ! क्या कहा, ...लगा !? लगना भी चाहिए, साँप है ही ऐसे चीज़ ! ...अरे ...अरे ये क्या कर रहें है अपना पाँव ऊपर क्यूँ उठा लिया जनाब. घबराईये नहीं साँप आपके ऑफिस, साइबर कैफ़े में नहीं आएगा! वैसे सच कहूँ लिखते-लिखते मेरे भी रोगटे खड़े हो गए!!!!!!!! अरे मेरे क्या मैं तो कहता हूँ साँप का नाम सुनते ही सबके रोयें खड़े हो जाते हैं. अब ज़्यादा नहीं डरूंगा आई मीन डराउंगा. आता हूँ मुख्य मुद्दे पर...

दुनियाँ में मुख्तलिफ़ (विभिन्न) प्रकार के साँप पाए जाते हैं जिनमें से कुछ ज़हरीले होते है तो कुछ ज़हरीले नहीं होते हैं. पौराणिक विश्वास के अनुसार माना जाता है कि साँप दुनियाँ के सबसे पहले और सबसे पुराने सरीसृप हैं. आज मैं आपको इस आलेख में दुनियाँ भर में पाए जाने वाले साँपों के बारे में कम शब्दों में बताऊंगा, मैं बताऊंगा कि दुनियाँ में कितने प्रकार के साँप पाए जाते हैं. सामान्यतया साँप को एक बेहद ज़हरीला, विषैला और ख़तरनाक जन्तु माना जाता है जिसके काटने से फ़ौरन ही किसी की मौत हो जाती है. लोग साँप का नाम सुनते ही मन में एक विचार ले आते हैं कि साँप मृत्यु का दुसरा नाम है. जबकि ऐसा कदापि नहीं है, कुछ साँप बिल्कुल भी ज़हरीले नहीं होते हैं, बल्कि बहुत सीधे और शांत भी होते हैं.


वैसे अगर ज़हरीले साँपों का ज़िक्र किया जाये तो दुनियाँ में कुल चार तरह के ज़हरीले साँप होते हैं:- 1. एलापिड्स  2. वैपरिड्स 3. कोलुब्रिड्स 4. हाइड्रोफ़ाईडी (समुंद्री)

एलापिड्स परिवार के साँप दुनियाँ में उष्णकटिबंधीय अथवा अर्थ-उष्णकटिबंधीय इलाकों में पाए जाते हैं. इस परिवार में 231 जातियां होती है. कुछ एलापिड्स के सदस्यों का नाम इस प्रकार है: कोबरा, किंग कोबरा, करैत! सभी के सभी बेहद ज़हरीले होते हैं. दुनियाँ का सबसे ख़तरनाक ज़हरीला साँप काला माम्बा इसी परिवार का अभिन्न अंग है. 

वाइपर अथवा वाईपराइड्स पूरी दुनियाँ में पाए जाते है सिवाय ऑस्ट्रेलिया और मेडागास्कर. इनका मुहँ अपेक्षाकृत थोड़ा बड़ा होती है. जिससे ये शिकार को आसानी से बेहतर तरीके से पकड़ लेते हैं. इस परिवार में 4 जातियां होतीं हैं: आज़ेमिओपिनि (Azemiopinae), वाइपरनी (Vipernae ), क्रोटेलिनी (Crotalinae) और काउसिनी (Causinae).

कोलुब्रिड साँप कोलूब्रिडी परिवार से ताल्लुक़ रखते हैं. इनकी खासियत है कि इनका पूरा शरीर स्केल्स से ढंका होता है. सामान्यतः यह परिवार नुकसान-रहित है और इनमें ज़हर नहीं पाया जाता है लेकिन कुछ साँप इनमें ऐसे भी हैं जिनके नुकीले दांत उनके मुह के पीछे की तरफ़ होते हैं और वे नुकसान दायक होते हैं लेकिन वह केवल अफ्रीकन ही होते हैं.

इस परिवार के सदस्यों में कुछ साँप रानी साँप, राजा साँप, ताज साँप, बैल साँप, चूहा साँप, मोज़ाबंध साँप, चिकना साँप, पानी साँप, दुधहिया साँप, बेल साँप, पेड़ पर रहने वला साँप आदि हैं. रानी साँप (Queen Snaik) ज़हरीला नहीं होता है और यह 60 सेंटीमीटर से ज़्यादा लम्बा नहीं होता है. जैतूनी रंग और गहरे भूरे रंग के होते हैं.

समुद्री साँप में कई तरह की प्रजातियाँ होती हैं.वे ज़मीन की तुलना में पानी में ज़्यादा निवास करते हैं.समुंद्री साँप कोबरा समूह से सम्बंधित होता है. वे दो मीटर तक लम्बे होते हैं. इनके परिवार में पचास से ज़्यादा प्रजातियाँ होती है और जिनमें से अधिकतर ज़हरीली होती हैं. इनके उपरे जबड़े में अपेक्षाकृत छोटे, नुकीले और थोड़े खोखले दांत होते हैं. इनमें लगभग 1.5 मिलीग्राम तक ज़हर होता है.

समुंद्री साँप थलीय साँप की अपेक्षा ज़्यादा ज़हरीले होते हैं.
इति-श्री
 -सलीम ख़ान
साँपों के बारे में अन्य जानकारी के लिए देखें- सर्प संसार
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+ comments + 4 comments

14 अगस्त 2010 को 5:25 pm

"इस्लाम अपने अत्यंत विस्तार काल मे भी अनुदार नही था, ब्लकि सारा संसार उसकी प्रशंसा कर रहा था । उस समय जबकि पश्चिमी दुनिया अंधकारमय थी, पूर्व क्षितिज मे एक उज्जवल सितारा चमका, जिससे विकल संसार को प्रकाश और शांति प्राप्त हुई ।इस्लाम झूठा मज़हब नही है , हिंदुओ को भी इसका उसी तरह अध्ययन करना चाहिए, जिस तरह मैने किया है ।
http://drayazahmad.blogspot.com/2010/08/mahatma-gandhi-ayaz-ahmad.html

14 अगस्त 2010 को 5:26 pm

मनुष्य का मार्ग और धर्म
पालनहार प्रभु ने मनुष्य की रचना दुख भोगने के लिए नहीं की है। दुख तो मनुष्य तब भोगता है जब वह ‘मार्ग’ से विचलित हो जाता है। मार्ग पर चलना ही मनुष्य का कत्र्तव्य और धर्म है। मार्ग से हटना अज्ञान और अधर्म है जो सारे दूखों का मूल है।
पालनहार प्रभु ने अपनी दया से मनुष्य की रचना की उसे ‘मार्ग’ दिखाया ताकि वह निरन्तर ज्ञान के द्वारा विकास और आनन्द के सोपान तय करता हुआ उस पद को प्राप्त कर ले जहाँ रोग,शोक, भय और मृत्यु की परछाइयाँ तक उसे न छू सकें। मार्ग सरल है, धर्म स्वाभाविक है। इसके लिए अप्राकृतिक और कष्टदायक साधनाओं को करने की नहीं बल्कि उन्हें छोड़ने की ज़रूरत है।
http://islamdharma.blogspot.com/

14 अगस्त 2010 को 5:43 pm

apki post , nice post .

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