
इस बारिश में डेंगू और मलेरिया का प्रकोप अपने चरम सीमा पर पहुँच चुका है. दिल्ली और लखनऊ जैसे महानगरों और नगरों में मलेरिया और डेंगू के मरीज़ की संख्या में लगातार इज़ाफा होता जा रहा है. कहते हैं कि मच्छर पीढ़ी-दर-पीढ़ी समझदार होते जा रहें, अगर इस साल आपने उनके लिए कोई इलाज़ तजवीज़ किया तो अगले साल उनमें उस इलाज़ का कोई असर नहीं होता और अपने आतंक का परचम वह लहराने लगते हैं. इन्सान के पास जो भी कारगर उपाय होता है वह धरा का धरा रह जाता है.
पहले तो मलेरिया था फ़िर आया डेंगू. अभी चिकनगुनियाँ आया...चिकनगुनियाँ के वाहक मच्छर तो साफ़ पानी में होते है और रात में ही नहीं दिन में काटते हैं! ज़्यादा कुछ नहीं लेकिन मच्छर द्वारा फ़ैलाये जा रहे रोगों और उसके लिए किये जा सकने वाले उपायों का ज़िक्र हम यहाँ करेंगे!
केवल मादा मच्छर ही इन्सान को काटती है, इस बात का खुलासा वैज्ञानिक रोनाल्ड रॉस ने किया था. बाद में और भी रिसर्च हुए और पता चला कि मच्छर तो निमित्त मात्र है, वह तो केवल वाहक है... इलज़ाम तो किसी और के कारण है मच्छर पर...! किसी इन्सान को जब मच्छर ने काटा तो मच्छर में स्थित परजीवी इन्सान के खून में आ जाता है और जब उसी इन्सान को कोई दूसरा मच्छर काटता है तो वही परजीवी उस मच्छर में पहुँच जाता है.
सावधानी ही बेहतर इलाज़ होता है इसलिए संक्षेप में जान लें कि कौन-कौन से उपाय है जो इससे निजात पाने में सहायक होते हैं:::
- बदन को खुला ना छोड़ें. पूरी बाजू के कपड़े पहनने की कोशिश करें.
- मच्छर मारने की दवा का इस्तेमाल करें.
- डेंगू होने पर बुख़ार में एसिटामिनोफेन लेना चाहिए.
- डेंगू में एस्पिरीन और आईब्रुफिन नहीं लेना चाहिए.
- बच्चों को तो डाक्टर की सलाह पर ही कुछ देना चाहिए.
- आराम खूब करना चाहिए.
- तरल पदार्थ इस्तेमाल करना चाहिए.
- डेंगू में हालत ख़राब होने पर बुख़ार आता है और तेज़ दर्द होता है.
- ऐसे बुखार में भूल कर भी घरेलू टोटके नहीं करने च्चिये.
- हाँ, पैरासिटामाल ले सकते हैं.
- उल्टियाँ, चिडचिडापन, सुस्ती, भ्रम जैसे कैफ़ियत भी होती है.
- मरीज को फ़ौरन ही हॉस्पिटल में एडमिट करके ग्लूकोज़ चढ़वाइए.
-सलीम ख़ान
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